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खेती की जमीन अधिग्रहण करके शहर बसाने के नुक़सान।

खेती की जमीन अधिग्रहण करके शहर बसाने के नुक़सान। भूमिका भारत जैसे कृषि प्रधान देश में खेती की जमीन केवल अन्न उत्पादन का स्रोत ही नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों की जीविका का आधार भी है। हाल के वर्षों में शहरीकरण की तेज़ रफ़्तार ने खेती योग्य जमीनों के अधिग्रहण की घटनाओं को बढ़ावा दिया है। सरकारें और निजी संस्थाएं सड़क, उद्योग, रियल एस्टेट, और स्मार्ट सिटी जैसे विकास कार्यों के नाम पर बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण कर रही हैं। यह प्रक्रिया जहाँ एक ओर 'विकास' के प्रतीक के रूप में देखी जाती है, वहीं दूसरी ओर इसके गंभीर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय नुक़सान भी सामने आ रहे हैं। 1. खाद्य सुरक्षा पर खतरा खेती की जमीनों का अधिग्रहण सीधे तौर पर खाद्य उत्पादन को प्रभावित करता है। जब उपजाऊ खेत शहरों, मॉल, हाइवे या हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में बदल दिए जाते हैं, तो अनाज, फल-सब्ज़ी और दूध का उत्पादन घटता है। इससे देश की खाद्य सुरक्षा संकट में पड़ सकती है, और भविष्य में भोजन की क़िल्लत या मूल्यवृद्धि जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। 2. किसानों की आजीविका पर चोट खेती की जमीन किसानों की रोज़ी-...